कल्याण घेटे
महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस के कल्याण शहर के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) कल्याण घेटे 30 अप्रैल 2026 को ससम्मान सेवानिवृत्त हो गए। कल्याण घेटे पॉलिटिकली इतने स्ट्रांग थे कि उन्होंने अपनी पूरी सर्विस कल्याण, उल्हासनगर और भिवंडी में ही की। इसी पॉलिटिकली रिलेशन की वजह से वे भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार करते रहे और कोई उनका कुछ भी नहीं ‘उखाड़’ पाया। लेकिन अब उनके बुरे दिन आने वाले हैं। कल्याण घेटे के सगे भांजे भूषण तायड़े ने एक भंगार वाले की हत्या कर दी। तब कल्याण घेटे पॉवर में थे। पूरे केस की लीपापोती कर दी और भूषण तायड़े को आरोपी होने से बचा लिया। समाजसेवक विवेक श्रीकांत पांडेय ने अब शिकायत कर उस मर्डर केस की पुनः जांच की मांग की है।
विवेक पांडेय कल्याण (पूर्व) में रहते हैं। उन्होंने 30 मई 2026 को शिकायत कर उस केस की पुनर्जांच की मांग की है। शिकायत की प्रति ABI (abinewz.com) के पास है। विवेक पांडेय का कहना है कि पुलिस प्रशासन द्वारा जांच न करवाने की स्थिति में वे बॉम्बे हाई कोर्ट में रिट पिटीशन फाइल करेंगे और केस की CID अथवा SIT से जांच करवाएंगे। उन्होंने कल्याण घेटे, भूषण तायड़े और पुलिस निरीक्षक विजय नाईक को आरोपी बनाने की मांग की है।
घटनाक्रम के अनुसार 15 मई 2024 को कल्याण (पश्चिम), ST बस डिपो के पास निर्माणाधीन स्मार्ट सिटी की साइट पर रात को सुरक्षा रक्षकों ने एक व्यक्ति को चोर समझकर पकड़ लिया। सुरक्षा रक्षकों ने अपने बॉस भूषण तायड़े को बताया कि उन्होंने साइट पर एक चोर को पकड़ लिया है। भूषण तायड़े तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। सबने उस ‘चोर’ को इतना मारा कि वह मर गया। भूषण तायड़े अपने सुरक्षा रक्षकों को प्रोत्साहित कर रहा था। बोल रहा था कि इस ‘चोर’ को इतना मारो कि मर जाए, जिससे कोई दूसरा चोर हमारी (विक्रांत सिक्युरिटीज) साइट पर आने की हिम्मत न करे। बताते हैं वह ‘चोर’ भंगार का धंधा करता था।
विक्रांत सिक्युरिटीज का मालिक भूषण तायड़े है। भूषण तायड़े रवींद्र तायड़े का बेटा है। रवींद्र तायड़े के बारे में इतना ही बताना काफी है कि वह सीनियर इंस्पेक्टर के पद से कल्याण के बाजारपेठ पुलिस स्टेशन से रिटायर हुआ है। रवींद्र तायड़े कल्याण घेटे का सगा साला है। तब कल्याण घेटे सर्विस में थे और कल्याण में ही ACP के पद पर विराजमान थे। साले (रवींद्र तायड़े) और भांजे (भूषण तायड़े) को बचाना उनका फर्ज था। सो उन्होंने वही किया।
वैसे कल्याण घेटे इस मामले में FIR ही दर्ज नहीं होने देते। लेकिन सुरक्षा रक्षकों ने श्याणपट्टी में ‘चोर’ की पिटाई का वीडियो वायरल कर दिया था इसलिए FIR (नंबर- 532/2024, धारा- 302, 34) दर्ज करनी पड़ी। FIR के बाद महात्मा फुले चौक (MFC) पुलिस ने 5 सुरक्षा रक्षकों को गिरफ्तार किया था। भूषण तायड़े को आरोपी ही नहीं बनाया। पुलिस निरीक्षक विजय नाईक को इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बनाया।
केस की कुछ झलकियां
1- ‘चोर’ (मृतक) को आजतक अज्ञात व्यक्ति की मौत करके दिखाया। 2- भूषण तायड़े ने भी ‘चोर’ की पिटाई की थी, परन्तु उसे आरोपी नहीं बनाया। 3- एक नाबालिग सुरक्षा रक्षक को मुख्य आरोपी बनाया। 4- जब एक आरोपी नाबालिग था तो वह पुलिस अधिकारी रवींद्र तायड़े के बेटे भूषण तायड़े की कंपनी में नौकरी कैसे कर रहा था। 6- FIR और चार्जशीट की स्टोरी में भिन्नता है। 7- चार्जशीट में पुलिस हवलदार एमयू गभाड़े का स्टेटमेंट है कि पुलिस निरीक्षक विजय नाईक ने जे. जे. अस्पताल को पत्र लिखकर निर्देश दिया था कि पोस्टमॉर्टम के दौरान मृतक की बॉडी की वीडियोग्रॉफी न करें। 8- सबसे महत्वपूर्ण कि कल्याण घेटे ने भी 16 मई 2024 को जे. जे. अस्पताल को पत्र लिखकर डॉक्टरों पर दबाव डाला था। 9- कल्याण घेटे ACP थे। एक अज्ञात व्यक्ति (चोर) की हत्या में जे. जे. अस्पताल को पत्र लिखने का उनका कोई तुक नहीं बनता।
